Padam Prabhu Chalisa in Hindi | पदम् प्रभु चालीसा | PDF

Padam prabhu Chalisa is capable of producing a wide range of results. Lord Padamprabhu is Jainism’s sixth Tirthankara. When he recites this chalisa, ghosts and spirits flee quickly. Nothing in the world is rarer than the one who repeated it every day with faith in his heart. Even the blind get eyesight, the hearing challenged gain hearing, and the unable to walk gain the ability to ascend the mountain by reciting Padam prabhu Chalisa on a daily basis.

Not only that, but Lord Padmaprabhu’s hallowed remembrance is linked to the world-cycle. As a result, the Padamprabhu Chalisa must be chanted forty times throughout the course of forty days.


Padam Prabhu Chalisa in Hindi Lyrics Video

Padamprabhu Chalisa

। पदमप्रभु चालीसा ।

शीश नवा अहँत को सिद्धन करूं प्रणाम।
उपाधयाय आचार्य का ले सुखकारी नाम॥
सर्वसाधु और सरस्वती जिन मंदिर सुखकार।
पद्मपुरी के पद्म को मन मन्दिर में धार॥ 1।

जय श्री पद्मप्रभु गुणधारी,
भवि जन को तुम हो हितकारी।
देवों के तुम देव कहाओ,
छट्टे तीर्थंकर कहलाओ॥ 2।

तीन काल तिहुं जग की जानो,
सब बातें क्षण में पहचानो।
वेष दिगम्बर धारण हारे,
तुम से कर्म शत्रु भी हारे॥ 3।

मूर्ति तुम्हारी कितनी सुन्दर,
दृष्टि सुखद जमती नासा पर।
क्रोध मान मद लोभ भगाया,
राग द्वेष का लेश न पाया॥ 4।

वीतराग तुम कहलाते हो,
सब जग के मन को भाते हो।
कौशाम्बी नगरी कहलाए,
राजा धारणजी बतलाए॥ 5।

सुन्दर नाम सुसीमा उनके,
जिनके उर से स्वामी जन्मे।
कितनी लम्बी उमर कहाई,
तीस लाख पूरब बतलाई॥ 6।

इक दिन हाथी बंधा निरख कर,
झट आया वैराग उमड़कर।
कार्तिक सुदी त्रयोदशि भारी,
तुमने मुनिपद दीक्षा धारी॥ 7।

सारे राज पाट को तज के,
तभी मनोहर वन में पहुंचे।
तप कर केवल ज्ञान उपाया,
चैत सुदी पूनम कहलाया॥ 8।

एक सौ दस गणधर बतलाए,
मुख्य वज्र चामर कहलाए।
लाखों मुनी अर्जिका लाखों,
श्रावक और श्राविका लाखों॥ 9।

असंख्यात तिर्यंच बताये,
देवी देव गिनत नहीं पाये।
फिर सम्मेदशिखर पर जाकर,
शिवरमणी को ली परणाकर॥ 10।

पंचम काल महा दुखदाई,
जब तुमने महिमा दिखलाई।
जयपुर राज ग्राम बाड़ा है,
स्टेशन शिवदासपुरा है॥ 11।

मूला नाम जाट का लड़का,
घर की नींव खोदने लगा।
खोदत 2 मूर्ति दिखाई,
उसने जनता को बतलाई॥ 12।

चिन्ह कमल लख लोग लगाई,
पद्म प्रभु की मूर्ति बताई।
मन में अति हर्षित होते हैं,
अपने दिल का मल धोते हैं॥ 13।

तुमने यह अतिशय दिखलाया,
भूत प्रेत को दूर भगाया।
जब गंधोदक छींटे मारे,
भूत प्रेत तब आप बकारे॥ 14।

जपने से जब नाम तुम्हारा,
भूत प्रेत वो करे किनारा।
ऐसी महिमा बतलाते हैं,
अन्धे भी आंखें पाते हैं॥ 15।

प्रतिमा श्वेत- वर्ण कहलाए,
देखत ही हृदय को भाए।
ध्यान तुम्हारा जो धरता है,
इस भव से वह नर तरता है॥ 16।

अन्धा देखे गूंगा गावे,
लंगड़ा पर्वत पर चढ़ जावे।
बहरा सुन-सुन कर खुश होवे,
जिस पर कृपा तुम्हारी होवे॥ 17।

मैं हूं स्वामी दास तुम्हारा,
मेरी नैया कर दो पारा।
चालीसे को चन्द्र बनावे,
पद्म प्रभु को शीश नवावे॥ 18।

नित चालीसहिं बार, पाठ करे चालीस दिन।
खेय सुगन्ध अपार, पद्मपुरी में आय के॥
होय कुबेर समान, जन्म दरिद्री होय जो।
जिसके नहिं सन्तान, नाम वंश जग में चले॥ 19।


Padam Prabhu Chalisa PDF

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